सिर्फ आपके लिए! - [हिंदुस्तान]

News Paper: 
Hindustan
Published On: 
1st March 2011
Aap Ke Liye

आज से 100 साल पहले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत हुई थी। कोशिश थी महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति सजग करना और उन्हें उनके अधिकार दिलवाना। आज स्थिति काफी बेहतर हो गई है। महिलाओं को अब ‘खास’ माना जाने लगा है, तभी तो सिर्फ उनके लिए कुछ खास सेवाओं की शुरुआत की जा चुकी है। 101वें अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कुछ ऐसी ही ‘सिर्फ महिलाओं के लिए’ उपलब्ध सुविधाओं पर एक नजर..

सामाजिक और आर्थिक दोनों स्तर पर महिलाओं ने नया मुकाम हासिल कर लिया है। वो जिस क्षेत्र में भी जा रही हैं, वहां अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। महिलाओं के गुण खास हैं और उन गुणों के बल वो हर क्षेत्र में सफल हो रही हैं। भारत में महिलाओं ने जब बड़ी तादाद में घर से बाहर निकलकर ऑफिस और फैक्टरी का रुख किया तो इसे महिलाओं की आजादी की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा गया। कुछ लोगों ने इसे संदेह की नजर से भी देखा..उनकी कार्यक्षमता पर तरह-तरह के सवाल उठाए गए..पर, अब वैसे सभी सवाल बेमानी हो गए हैं। महिलाएं मल्टी-टास्किंग की उस्ताद हैं। वो जितने अच्छे तरीके से घर संभालती हैं, उतने की अच्छे तरीके से ऑफिस की अपनी जिम्मेदारियों को भी संभाल सकती हैं। अब जमाना इस बात की तसदीक करता है। इसलिए अब धीरे-धीरे सवाल कम होने लगे हैं और महिलाओं के हुनर के कद्रदान बढ़ने लगे हैं। समाज उन्हें अब खास मानने लगा है। इस बदलाव में उन महिलाओं की भी अहम भूमिका रही है, जो अपनी सफलता का परचम लहरा चुकी हैं। इन्होंने समाज के हाशिये पर खड़ी महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत का काम किया और साथ उनके लिए नई राहें भी खोलीं। इन बदलावों का असर यह हुआ है कि अब सिर्फ महिलाओं के लिए, उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए, उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट देने के लिए कई सेवाएं शुरू हो गई हैं।

आपका जॉब पोर्टल

इंटरनेट पर जॉब पोर्टल्स की कोई कमी नहीं है, पर क्या आज से कुछ साल पहले भी आप यह कल्पना कर सकती थीं कि सिर्फ महिलाओं के लिए कोई जॉब पोर्टल शुरू किया जा सकता है। पर यह सच्चाई है। विश्वास नहीं होता तो www.naukriforwomen.com पर जाएं। इस वेबसाइट को जनवरी 2009 में शुरू किया गया और पिछले दो सालों में यह भारत का सबसे तेजी से बढ़ने वाला जॉब पोर्टल बन चुका है। महिलाओं के बीच यह प्रोडक्ट लोकप्रिय हो रहा है और इसलिए सफल भी रहा है। इस वेबसाइट की लोकप्रियता का प्रमुख कारण है, इसका वुमन फ्रेंडली होना। यहां जो भी जॉब वेकेंसी अपलोड की जाती हैं, उनमें फेल्क्सी टाइमिंग, घर से काम करने की सुविधा जैसे विकल्पों पर काफी जोर दिया जाता है। घर से काम करने की सुविधा इस वेबसाइट के सदस्यों के बीच सबसे लोकप्रिय फीचर है।

इस वेबसाइट को शुरू किया है प्रिया और पुलक मोहंती ने। यह वेबसाइट इस बात की तसदीक करती है कि महिलाओं में खास गुण होते हैं और कार्यस्थल से संबंधी उनकी जरूरतें पुरुषों से अलग होती हैं। यह वेबसाइट कंपनियों और महिलाओं दोनों को एक कॉमन प्लेटफॉर्म देती है, जहां ये दोनों एक-दूसरे की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ सकें और वर्कप्लेस को वुमेन फ्रेंडली बनाया जा सके।

इस वेबसाइट पर अपनी जॉब पोस्ट करने के लिए कंपनियों को एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कंपनी के बारे में पूरी छानबीन करने के बाद सपोर्ट स्टाफ को उस कंपनी पर अपनी सहमती देनी होती है। इस प्रक्रिया के बाद इस जॉब पोर्टल के सदस्य नौकरियों के लिए आवेदन कर पाते हैं। अब तक इस वेबसाइट पर समाज के हर वर्ग की महिलाओं के लिए हजारों की संख्या में कंपनियां जॉब पोस्ट कर चुकी हैं और इसके सदस्यों की संख्या लाखों में है।

सैर-सपाटा, अकेले-अकेले

लड़की हो, अकेले घूमने कैसे जाओगी? ऐसे सवाल अब बेमानी हो गए हैं। महिलाएं अब अपने पिता, पति या भाई के साथ के बिना लद्दाख से लेकर बैंकॉक तक घूमने जा रही हैं और ये सब संभव हो रहा है सिर्फ महिलाओं के लिए आयोजित होने वाले ट्रैवल ट्रिप्स की मदद से। सिर्फ महिलाओं के लिए अब गर्ल्स ऑन दी गो और वुमन ऑन वंडरलस्ट (वाउ) जैसे ट्रैवलिंग क्लब नियमित अंतराल पर देश-विदेश के अलग-अलग हिस्सों में घूमने के लिए ट्रिप्स का आयोजन कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस तरह के ट्रैवल क्लबों की स्थापना भी महिलाओं ने की है और विशेष रूप से ऐसी महिलाओं ने, जो लंबे अरसे से अकेले घुमक्कड़ी की शौकीन रही हैं और अकेले घूम रही हैं। मसलन, गर्ल्स्‍ ऑन दी गो की शुरुआत 2008 में दिल्ली की प्रिया बोस देसाई ने की। प्रिया ने फाइनेंस लॉयर की अपनी अच्छी-खासी नौकरी से इस्तीफा देकर इस ट्रैवल क्लब की स्थापना की।
शुरुआत में इस कंपनी के सभी विभाग फाइनेंस, अकाउंट्स से लेकर एडवरटाइजिंग तक की जिम्मेदारी प्रिया अकेले संभाल रही थीं। यह आइडिया ग्राहकों के बीच अपेक्षा से जल्दी ही लोकप्रिय हो गया और प्रिया 24 महिलाओं के ग्रुप के साथ दस दिन के लेह-लद्दाख की ट्रिप पर जाने के लिए तैयार थीं। इस तरह के ट्रिप महिलाओं को न सिर्फ आजादी का नया एहसास देते हैं, बल्कि नए दोस्त और नई सोच विकसित करने का मौका भी देते हैं। वुमेन ओनली ट्रैवल क्लब के क्षेत्र में शुरुआत की थी 2005 में सुमित्र सेनापति ने वुमेन ऑन वंडरलस्ट की स्थापना के साथ। सेनापति दिल्ली में फ्रीलांस राइटिंग करती थीं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अकेले घूमना इनका शौक था। ऐसे ही किसी एक ट्रिप के दौरान लंदन में महिलाओं के एक ग्रुप से मुलाकात के बाद इस ट्रैवल ग्रुप का आइडिया उनके दिमाग में आया। सेनापति अपने इस ट्रैवल ग्रुप के साथ ग्रीस, यूरोप, दक्षिण अफ्रीका और चीन तक घूम कर आ चुकी हैं।

कैब सर्विस.. ‘फॉर शी’

शहर में अकेले सफर कर रही हैं। टैक्सी या ऑटो तो बुक कर लिया..पर, मन ही मन यह डर कि सही-सलामत अपनी मंजिल तक पहुंच जाऊं। महिलाओं के लिए सफर के दौरान इस तरह के डर से रू-ब-रू होना कोई नई बात नहीं है। पर, अब इस समस्या से निजात पाने के लिए वुमेन ओनली कैब सर्विस शुरू हो चुकी है। इस कैब सर्विस का नाम है, फॉर शी। इस कैब सर्विस को महिलाओं के द्वारा सिर्फ महिलाओं के लिए फिलहाल दिल्ली, एनसीआर और मुंबई में चलाया जा रहा है। कैब के सभी ड्राइवरों को ट्रेनिंग मारुति उद्योग द्वारा संचालित संस्थान आईडीटीआर में दी गई है। महिला ड्राइवर को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग भी दी गई है। सिर्फ इतना ही नहीं, जीपीएस की मदद से सभी कैब पर कंट्रोल रूम से नजर भी रखी जाती है।

वसुंधरा..आपका बैंक

पैसों के हिसाब-किताब के मामले में, सही वक्त पर सही जगह निवेश के मामले में यानी पैसे से जुड़े मामलों में महिलाएं पीछे रहती हैं..यह आम धारणा है। पर आम धारणा और सच्चाई एक जैसी हो यह जरूरी तो नहीं? घर का बजट महिलाएं संभालती हैं तो बैंकिंग के क्षेत्र में चंदा कोचर से लेकर नैना लाल किदवई तक अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं। देश के छोटे-छोटे गांव से लेकर महानगरों तक माइक्रो फाइनेंसिंग के क्षेत्र में हजारों महिलाएं सक्रिय हैं। वो अपनी सीमित आमदनी से भी बचत कर रही हैं। बचत के क्षेत्र में महिलाओं के बीच बढ़ते इसी ट्रैंड को बढ़ावा देने और बैंकिंग की पूरी प्रक्रिया को उनके लिए स्पेशल बनाने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने लखनऊ में सिर्फ महिलाओं के लिए वसुंधरा नाम से कुछ साल पहले एक बैंक खोला है। यहां बैंकिंग के अलावा महिलाएं कॉफी की चुस्की ले सकती हैं, पैरों में मसाज करवा सकती हैं और अगर मूड है तो टीवी पर अपने प्रिय धारावाहिक भी देख सकती हैं। अगर पुरुषों को लगता है कि एसबीआई उन्हें अनदेखा कर रही है तो ऐसा बिल्कुल नहीं हैं। बैंकिंग के साथ यहां उपलब्ध अन्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए पुरुषों को यहां किसी महिला के साथ जॉइंट अकाउंट खोलना भर होगा।

ये है खास पुलिस बटालियन

पुलिस बटालियन में कुछ महिला ऑफिसरों को शामिल करना तो कोई नई बात नहीं है, पर नई बात यह है कि भारत के राजस्थान में अब सिर्फ महिलाओं की एक पुलिस बटालियन है। 480 महिला ऑफिसर की इस बटालियन का नाम है, हड़ी रानी पुलिस बटालियन। यह महिला सशक्तिकरण का अपने-आप में एक नायाब उदाहरण है। इस बटालियन ने 26 सितंबर, 2010 से कमान संभाली है। इनकी भर्ती एक साल पहले हुई और इस एक साल के दौरान इन्हें कई तरह की ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा ताकि डय़ूटी के दौरान आने वाली सभी तरह की चुनौतियों का ये महिला ऑफिसर सामना कर सकें। सीआरपीएफ और बीएसएफ की महिला बटालियन पहले से है, पर पुलिस सेवा के मामले में यह देश की पहली महिला बटालियन है।